आज के समय में मोबाइल फोन हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा बन चुका है और इस पूरे अनुभव का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है उसकी टच स्क्रीन। टच स्क्रीन वह तकनीक है जिसकी मदद से हम उंगलियों के स्पर्श से मोबाइल को चला पाते हैं। पहले के समय में मोबाइल फोन में बटन हुआ करते थे, लेकिन जैसे-जैसे तकनीक आगे बढ़ी, बटनों की जगह टच स्क्रीन ने ले ली। आज लगभग हर स्मार्टफोन टच स्क्रीन पर आधारित है। इसी स्क्रीन के जरिए हम कॉल करते हैं, मैसेज भेजते हैं, वीडियो देखते हैं, गेम खेलते हैं और इंटरनेट का उपयोग करते हैं।
मोबाइल टच स्क्रीन का विकास
टच स्क्रीन तकनीक कोई नई खोज नहीं है। इसकी शुरुआत कई दशक पहले हो चुकी थी, लेकिन इसका आम उपयोग स्मार्टफोन के आने के बाद शुरू हुआ। पहले यह तकनीक केवल बड़े-बड़े मशीनों और विशेष उपकरणों में इस्तेमाल होती थी। जब मोबाइल कंपनियों ने इसे अपने फोन में अपनाया, तब यह तकनीक आम लोगों तक पहुँची। धीरे-धीरे टच स्क्रीन अधिक संवेदनशील, टिकाऊ और तेज होती चली गई। आज की आधुनिक टच स्क्रीन बहुत हल्के स्पर्श को भी पहचान लेती है।
टच स्क्रीन के अंदर क्या होता है
मोबाइल की टच स्क्रीन केवल कांच का एक टुकड़ा नहीं होती, बल्कि इसके नीचे कई परतें होती हैं जो इसे काम करने योग्य बनाती हैं। सबसे ऊपर सुरक्षा के लिए मजबूत कांच की परत होती है जिसे हम रोज देखते और छूते हैं। इसके नीचे एक विशेष प्रकार की पारदर्शी परत होती है जो बिजली के बहुत हल्के संकेतों को पहचानने में सक्षम होती है। इसके नीचे डिस्प्ले पैनल होता है, जो हमें रंगीन तस्वीरें और वीडियो दिखाता है। ये सभी परतें मिलकर टच स्क्रीन को सही तरीके से काम करने लायक बनाती हैं।
टच स्क्रीन के काम करने का मूल सिद्धांत
टच स्क्रीन का काम करने का आधार यह है कि यह हमारे स्पर्श को एक सिग्नल के रूप में पहचानती है और उसे मोबाइल के प्रोसेसर तक भेजती है। जब हम अपनी उंगली से स्क्रीन को छूते हैं, तो स्क्रीन उस जगह पर होने वाले बहुत ही छोटे से बदलाव को पकड़ लेती है। यह बदलाव कभी विद्युत प्रवाह के रूप में होता है और कभी दबाव के रूप में। इसके बाद मोबाइल का सिस्टम यह समझता है कि आपने स्क्रीन के किस हिस्से को छुआ है और उसी के अनुसार वह काम करता है।
कैपेसिटिव टच स्क्रीन कैसे काम करती है
आज के लगभग सभी स्मार्टफोन में कैपेसिटिव टच स्क्रीन का उपयोग होता है। यह टच स्क्रीन बिजली के छोटे-छोटे चार्ज पर काम करती है। जब हम अपनी उंगली से स्क्रीन को छूते हैं, तो हमारी उंगली में मौजूद प्राकृतिक विद्युत तत्व स्क्रीन के बिजली प्रवाह में हल्का सा बदलाव कर देता है। यह बदलाव तुरंत मोबाइल के प्रोसेसर तक पहुँच जाता है और मोबाइल समझ जाता है कि आपने स्क्रीन के किस हिस्से को छुआ है। इसी तकनीक की वजह से आज हमें मल्टी टच की सुविधा मिलती है, यानी हम एक ही समय में दो या अधिक उंगलियों से स्क्रीन को चला सकते हैं।
रेसिस्टिव टच स्क्रीन का कार्य तरीका
रेसिस्टिव टच स्क्रीन आजकल बहुत कम देखने को मिलती है, लेकिन पहले के समय में इसका काफी उपयोग होता था। यह टच स्क्रीन दबाव के आधार पर काम करती है। जब हम स्क्रीन को दबाते हैं, तो उसकी ऊपरी और निचली परत आपस में जुड़ जाती हैं और एक सिग्नल तैयार होता है। इस सिग्नल से मोबाइल पता कर लेता है कि स्क्रीन को कहाँ छुआ गया है। इस तकनीक में उंगली के अलावा स्टायलस या किसी भी वस्तु से स्क्रीन को चलाया जा सकता था, लेकिन इसकी संवेदनशीलता काफी कम होती थी।
मल्टी टच तकनीक क्या है
मल्टी टच तकनीक वह सुविधा है जिससे हम एक समय में दो या उससे अधिक उंगलियों से स्क्रीन को चला सकते हैं। उदाहरण के तौर पर जब हम फोटो को दो उंगलियों से बड़ा या छोटा करते हैं, तो यह मल्टी टच का ही कमाल होता है। इस तकनीक में स्क्रीन एक साथ कई अलग-अलग स्पर्श बिंदुओं को पहचानती है और मोबाइल उन सभी संकेतों को एक साथ समझकर काम करता है। यही कारण है कि आज हम स्क्रीन पर जूम कर पाते हैं, गेम खेल पाते हैं और अलग-अलग इशारों से मोबाइल चला पाते हैं।
टच स्क्रीन और प्रोसेसर का आपसी संबंध
टच स्क्रीन अकेले कुछ नहीं करती, बल्कि यह मोबाइल के प्रोसेसर से जुड़ी होती है। जब हम स्क्रीन को छूते हैं, तो स्क्रीन उस स्पर्श को इलेक्ट्रिक सिग्नल में बदलती है। यह सिग्नल मोबाइल के प्रोसेसर तक पहुँचता है। प्रोसेसर उस सिग्नल को समझता है और यह तय करता है कि कौन-सा ऐप खोलना है, कौन-सा बटन दबाया गया है या कौन-सा काम किया जाना है। इसके बाद प्रोसेसर डिस्प्ले को नया आदेश देता है और हमें तुरंत उसका परिणाम स्क्रीन पर दिखाई देता है।
टच स्क्रीन में ग्लास की भूमिका
मोबाइल की टच स्क्रीन में जो कांच होता है, वह सामान्य कांच नहीं होता। यह विशेष रूप से मजबूत बनाया जाता है, ताकि रोजमर्रा के उपयोग में यह टूटे नहीं। आजकल गोरिल्ला ग्लास जैसे खास कांच का उपयोग किया जाता है, जो गिरने और खरोंच लगने से काफी हद तक सुरक्षा देता है। यह कांच न केवल स्क्रीन को सुरक्षित रखता है, बल्कि टच के अनुभव को भी बेहतर बनाता है, जिससे उंगली आराम से फिसल सके।
टच स्क्रीन में रंगीन डिस्प्ले कैसे दिखता है
टच स्क्रीन के नीचे लगा डिस्प्ले पैनल हमें वीडियो, फोटो और ऐप्स के रंगीन दृश्य दिखाता है। यह पैनल लाखों छोटे-छोटे पिक्सल से बना होता है। हर पिक्सल अपने आप में लाल, हरे और नीले रंग से मिलकर बना होता है। जब ये तीनों रंग अलग-अलग मात्रा में मिलते हैं, तो हमें अलग-अलग रंग दिखाई देते हैं। मोबाइल का प्रोसेसर इन पिक्सल्स को बहुत तेजी से नियंत्रित करता है, जिससे हमें हर मूवमेंट साफ और स्मूथ दिखाई देता है।
टच स्क्रीन की संवेदनशीलता कैसे नियंत्रित होती है
टच स्क्रीन की संवेदनशीलता को मोबाइल का सॉफ्टवेयर नियंत्रित करता है। इसमें यह तय किया जाता है कि स्क्रीन किसी स्पर्श को कितनी जल्दी और कितनी सटीकता से पहचान कर प्रतिक्रिया दे। अगर संवेदनशीलता ज्यादा हो तो हल्का सा स्पर्श भी काम कर जाता है और अगर कम हो तो ज्यादा दबाव डालना पड़ता है। यही कारण है कि कुछ मोबाइल में टच बहुत स्मूथ लगता है और कुछ में थोड़ी देर से प्रतिक्रिया मिलती है।
मोबाइल टच स्क्रीन के फायदे
मोबाइल में टच स्क्रीन होने से उसे चलाना बेहद आसान हो गया है। अब किसी भी काम के लिए बटन ढूंढने की जरूरत नहीं पड़ती। बस स्क्रीन पर उंगली फेरते ही काम हो जाता है। टच स्क्रीन की वजह से मोबाइल का आकार भी बड़ा और आकर्षक हो गया है। वीडियो देखना, गेम खेलना और इंटरनेट चलाना पहले से कहीं ज्यादा आसान और मजेदार हो गया है। इसके अलावा टच स्क्रीन ने मोबाइल को ज्यादा स्मार्ट और आधुनिक बना दिया है।
मोबाइल टच स्क्रीन की कुछ सीमाएँ
हालांकि टच स्क्रीन बहुत उपयोगी है, लेकिन इसकी कुछ सीमाएँ भी हैं। यह कांच की बनी होती है, इसलिए गिरने पर टूटने का खतरा रहता है। धूप में कभी-कभी स्क्रीन साफ दिखाई नहीं देती। अधिक समय तक मोबाइल इस्तेमाल करने से उंगलियों में थकान भी होती है। इसके अलावा बहुत ठंड या बहुत गर्म वातावरण में टच स्क्रीन की प्रतिक्रिया प्रभावित हो सकती है।
भविष्य की टच स्क्रीन तकनीक
आने वाले समय में टच स्क्रीन तकनीक और भी उन्नत होने वाली है। भविष्य में हमें ऐसे मोबाइल देखने को मिल सकते हैं जिनकी स्क्रीन मुड़ने वाली होगी, अपने आप साफ होने वाली होगी और ज्यादा मजबूत भी होगी। इसके अलावा टच के साथ-साथ हवा में किए गए इशारों से भी मोबाइल चलाया जा सकेगा। वैज्ञानिक ऐसी स्क्रीन पर भी काम कर रहे हैं जो हमारी उंगलियों के दबाव को अलग-अलग स्तर पर पहचान सके।
मोबाइल टच स्क्रीन आज की डिजिटल दुनिया की रीढ़ बन चुकी है। इसी तकनीक की वजह से मोबाइल फोन इतना सरल, स्मार्ट और उपयोगी बन पाया है। टच स्क्रीन ने इंसान और मशीन के बीच की दूरी को बहुत कम कर दिया है। आज हम सिर्फ उंगली के एक स्पर्श से पूरी दुनिया की जानकारी अपने मोबाइल पर पा सकते हैं। यह कहना गलत नहीं होगा कि टच स्क्रीन ने हमारे जीवन को पूरी तरह बदल दिया है और आने वाले समय में यह तकनीक और भी ज्यादा उन्नत रूप में हमारे सामने आएगी।